मंगलवार, 14 अक्तूबर 2014

कौन कैलाश सत्यार्थी

बीते दिनों श्री कैलाश सत्यार्थी जी को नोबेल दिए जाने की घोषणा हुई। मेरी पुत्री मुझ से कहने लगी "ये हैं कौन ?आज तक इनका नाम तो कहीं नहीं सुना,  ये करते क्या हैं  " मैं पशोपेश में हूँ कि क्या जवाब दूँ ?  सच बताइयेगा कि क्या आपने सुना है पहले इनका नाम। सरकारी नौकरी के सुख को सालों पहले त्यागकर एक शख्श ,भारत ही नहीं अपितु संसार भर के अनाथ बच्चों के लिए कुछ करने को जूझ रहा है ,और उसे अपने ही देश में ७५ प्रतिशत लोग नहीं पहचानते। संसार उसके जज्बे को सलाम कर उसे नोबेल देने की घोषणा करता है और उसके अपने देश के लोग पूछते हैं कि भाई ये कौन सी बला है.
                                                             असल में इन्हें पहचाने भी तो कैसे ?भाई वाकई आपकी हमारी कोई गलती नहीं है ,गलती इन्ही की है ,अगर पहचान ही चाहते थे तो राजनीति में आ सकते थे ,छिछोरे गाने गाकर कामुक अंदाज में कोई हरकत करते ,क्रिकेट खेलते ,विज्ञापन करते ,जंतर मंतर पर धरना देते ,स्टेटस (?) वाले लोगों के बीच उठते बैठते,ट्विटर पर चुटीले कमेंट्स करते ,कहीं आश्रम खोलकर प्रवचन करते तो कोई बात भी थी। कैसे नहीं आप हम इन्हे जानते -पहचानते ,इनके प्रशंशक बनते।भाई चुपचाप मीडिया -प्रचार की चकाचौंध से दूर निस्वार्थ भाव से अपने अंतर्मन  की एक आवाज पर स्वयं को शोषितों -कमजोरों के लिए खपाने वाले की भला हमारे महान देश में क्या बिसात। सत्यार्थी जी इसमें हमारी आधुनिक और तेजी से आगे बढ़ने वाली नौजवान पीढ़ी की कोई गलती नहीं। उन्हें तो अपने पड़ोस में रहने वाले निस्संतान बुजुर्ग दंपत्ति का नाम नहीं पता, तो आप भला क्या चीज हैं ?उन्हें ये नहीं पता की पड़ोस में जिस शादी की दावत में भोजन की पंक्ति में  सबसे आगे दिख रहे हैं ,वो लड़के वालों का घर है या वधु पक्ष का। आप भी क्या बात करते हैं साहब ?बेचारे लेटेस्ट apps का ध्यान रखें या इन बेकार की बातों पर सर खपाएं। हन्नी सिंह और बीबर का नया एल्बम आने वाला है ,इसकी जानकारी होना ही उन्हें कूल डूड बनाएगा न कि ये जानना कि बीते दिनों कश्मीर की बाढ़ से प्रभावित हुए लोगों का क्या हाल है ?ऑफिस की पार्टी के चक्कर में ,माँ की -पिता की दवा लाने की फुर्सत जिस कौम के पास नहीं ,उसने यदि आप का नाम नहीं सुना तो क्या गुनाह हो गया। फिर आशाराम बापू के छींकने तक की खबर    जो मीडिया घंटों चैनल पर दिखाता है ,उसने आज तक कभी आप पर ध्यान देने की कृपा नहीं करी,तो हमें दोष क्यों।
     सच कहूँ मित्रों ?मैंने भी सत्यार्थी जी का नाम पहले नहीं सुना था। किन्तु इसके लिए मैं इन दिनों में कई बार ग्लानि से भरकर खुद को कोस चुका  हूँ। वास्तव में हम लोग खुद को ही छलकर एक झूठे माहौल में जीने के आदि  हो चुके हैं। आत्मकेंद्रित होकर हम मात्र उसके बारे में ही सोचना जानना चाहते हैं जो किसी प्रकार हमारे लिए कोई लाभ के अवसर पैदा कर सकता है। वरना हमारी बला से कौन जीता है ,कौन मरता है ,ये जानने की न हमारी तबियत होती है न हमारे पास समय है। हम बहुत गफलत के माहौल में जी रहे हैं दोस्तों। ये रास्ता आगे हमें कहाँ ले जाकर छोड़ेगा ,ये सोचकर भी मैं थर्रा जाता हूँ। अपने बच्चों में attitude देखकर हम खुश हो रहे हैं ,छोटी आयु में उन्हें गाडी -फ़ोन -इंटरनेट देकर खुद को फॉरवर्ड होने का जो भ्रम हम पाल रहे हैं ,यही एक दिन हमें खून के आंसू रुलाएगा ,ये तय है।
                                                 संसार के बहुत लोगों को हमारी आवश्यकता है। अपना पेट तो जानवर भी भरता है ,अपने घर की देखभाल तो जंगली जानवर भी करता है। अपने बच्चों को दाना तो एक छोटी सी चिड़िया भी खिला देती है। अनपढ़ होकर और कभी विदेश न जाकर भी जानवर तक कई प्रकार के करतब सर्कस में दिखा सकता है ,फिर हम किस लिए प्रकृति की श्रेष्ट रचना हुए ,ये समझ से बाहर है।
                                   समय है ,चेतिए और बदलिये स्वयं को। ये चारदीवारी हमारा घर नहीं है ,ये तो मात्र हमारे रहने का कमरा है। घर तो  समस्त संसार है। दूर बसे हुए लाचार मजबूर लोग भी हमारे सम्बन्धी हैं। कल हमने भी बुजुर्ग होना है। बाढ़ -भूकम्प हमें भी एक झटके में राजा से रंक बना सकता है। बिना बताये ह्रदय की एक धड़कन  चुटकी बजाकर हमारे कामदेव से रूप को एक तरफ़ा लकवा मार कर बदसूरत कर सकती है। कोई सा भी जहाज -रेल -कार एक्सीडेंट,सालों जिम में पसीना बहाकर सुडौल बनाये हमारे इस शरीर की धज्जियाँ उड़ा सकता है। सहज बनिये ,अपने आस पास नजर रखिये ,क्या पता कोई आपकी सहायता के लिए टकटकी लगाये हो ?स्वयं से बाहर निकालिये…   फिर कभी न पूछना पड़े ……कौन कैलाश सत्यार्थी ?  

5 टिप्‍पणियां:

  1. पंडितजी चरण स्पर्श ....लेख बहुत अच्छा है ...लेकिन इससे सम्बंधित और भी धुआ उठ रहा है ...की इनका समबन्ध फोर्ड फाउंडेशन से है ...इन्होने बच्चो को इसाई बनाया ...जहा जापान और दुसरे देशो में बच्चो द्वारा काम को Active Economic Child कहा जाता है . श्री राजीव दीक्षित जी भी बाल मजदूर और उसके पीछे के षड़यंत्र के बारे में बता चुके है ...लेकिन राजीव भाई का नाम आज बहुत कम लोग जानते है . इन्होने अपना सारा जीवन भारत और भारत वासिओ के ही नाम कर दिया था . गूगल कर उनके बारे में जाना जा सकता है ....इनकी मौत भी अभी तक रहस्य बनि हुई है ..
    ये देखिये एक मित्र द्वारा भेजा हुआ लेख ...
    स्वामी अग्निवेश एवं उनके शिष्य कैलाश सत्यार्थी और फिर बाद में स्वामी के अलग हो जाने के बाद कैलाश सत्यार्थी ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि कालीन व दरी बनाने के काम में बच्चों को शामिल किया जाता है. इसलिए इसमें बच्चों का खून शामिल है. कहने को तो यह बाल मजदूरी के विरुद्ध आंदोलन था, लेकिन इसका असल निशाना नस्ल दर नस्ल ट्रांस्फर होने वाले पारंपरिक उद्योग थे, जो बचपन से ही सीखे जा सकते हैं.
    इस पत्रकार ने दिल्ली एवं नोएडा के कई फ्लैटों में कैलाश सत्यार्थी द्वारा चलाई जा रही मुहिम और शिविरों का निरीक्षण किया था, जहां अनेक बच्चे भदोई, मिर्जापुर एवं कोपागंज से लाकर, बंदी बनाकर रखे गए थे. उन बच्चों ने डरते हुए बताया था कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध पकड़ कर लाया गया है और जबर्दस्ती उन्हें परेशान करने के बयान अख़बार वालों को दिलाए जा रहे हैं.
    उस समय जांच-पड़ताल के बाद साबित हुआ था कि जर्मनी, जो अन्य विदेशी राष्ट्रों के साथ मशीन से कालीन बनाता था, को भारत की हस्तनिर्मित सुंदर एवं आकर्षक कालीनों से बाज़ार में मुकाबला करना पड़ता था और मार्केटिंग में कठिनाई होती थी. इसलिए अग्निवेश एवं कैलाश सत्यार्थी को बाल मजदूरी के बहाने उकसाया गया, मगर जब यह साजिश स्वामी पर खुल गई, तो उन्होंने इससे कन्नी काट ली. तब कैलाश सत्यार्थी ने अकेले मोर्चा संभाल लिया और जर्मनी का थोपा हुआ एगमार्क कालीनों पर लगवाने में मुख्य भूमिका निभाई. एगमार्क यह प्रमाण था कि इस कालीन की बुनाई में बच्चे शामिल नहीं हैं. इस प्रकार बच्चों को कालीन की बुनाई से अलग करते ही हाथ की बुनी कालीन का उद्योग का बुरी तरह प्रभावित होने लगा और अब अधिकतर ठप हो चुका है.
    http://www.chauthiduniya.com/2014/03/nai-aarthik-neeti-ka-virodh-kyun-nahin.html

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  2. पता नहीं क्या हकीकत है आनंद जी,किन्तु जो भी हो बचपन बचना चाहिए बस.अपनी बात साझा करने के लिए शुक्रिया

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  3. Pandit Ji Sadar Pranam...
    Aapke Blog padhta hoon, padhkar bahut hi goodh gyan prapt hota hai aur sikhne ka mauka milta hai. Iske liye aapko Dhanyawad...
    Apni birth details de raha hoon, Kripya karke margdarshan de aur ho sake toh meri Kundli ko apne Blog mein Udaharan ke roop mein prastut karen...

    Name- Gaurav Mishra
    DOB- 22-Oct-1986
    Time- 13:18 PM
    Place- Lucknow (Uttar Pradesh) India
    Questions:1. Abhi tak Career ki koi sahi setting nahi hui hai, jabki Siksha MBA hai. (Currently earning only 6000/- Rs per Month) Kya Govt. Job ka yog hai???

    Ek sajjan ko aaj se kuchh varsh pehle apni kundli dikhayi toh Unhone bataya tha ki Kundli mein bahut sare Rajyog hain jo is prakar hain...
    A. Malavya Yog
    B. Ruchak Mahapurush Yog
    C. Lagnesh aur Aayesh ka Parivartan Yog
    D. Surya Neech Rashi Bhang Yog
    E. Buddha-Aditya yog
    F. Kendra-Trikona Yog
    G. Bhagyesh aur Karmesh Yuti Yog in Kendra
    & Many More...
    Lekin aaj 6-7 varsh ke baad bhi mein in yogon ka Utilize nahi kar paya hoon, Kripya karke batayn ki kahan Chook ho rahi hai.
    Aapka aabhari rahunga...
    Sa-Dhanyawad...
    Gaurav Mishra
    09795034134
    mishraa786@gmail.com

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  4. Pranam guru g.. Kark lagna me mangal neech ho...aur chandra karmesh me to kya neech bhang hua ya nhi...

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    1. यदि आपका प्रश्न ये है कि कर्क लग्न में मंगल लग्न व चंद्रमा दशम में है,तो मैं इसे नीचभंग नहीं कहूँगा मित्र..तत्व के आधार पर दोनों ग्रह अपने विपरीत स्वभाव की राशि में माने जाएंगे..ऐसे में किये गए कार्य का अधिकाँश हिस्सा व्यर्थ में चला जाएगा...रसोईघर में जल व अग्नि एक ही दिशा में होगी तो धन रुकना भारी हो जाएगा..घर के मुख्य द्वार के दक्षिण से पानी की निकासी व पश्चिम में मकान की सीढ़ी के सात पायदान देखने में आते हैं...बहुत मेहनत के पश्चात भी कार्यों का न बन पाना इसके प्रभाव के रूप में देखा जा सकता है...आँगन में लगा वृक्ष जो फलदार हो व पानी के श्रोत को बंद कर हालात में 1 वर्ष के भीतर परिवर्तन होता है..

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