रविवार, 31 अगस्त 2014

Ahilya... अहिल्या ....... गौतम ऋषि की भार्या:.....

जरा इन पंक्तियों पर गौर कीजिये ……जनकपुरी में हो रहे सीता स्वयंवर में प्रभु राम -लक्ष्मण को ले जा रहे गुरु विश्वामित्र जी गौतम ऋषि द्वारा त्यागे गए आश्रम में जहाँ कि माता अहिल्या जी पाषाण शिला के रूप में शापित हो विराजमान हैं ,से उनका परिचय करा रहे हैं। पंक्तियाँ अपने भेद को स्वयं उजागर कर उस प्रसंग विशेष का महत्त्व सामने ला रही हैं ……    
                हे राम सुनो ये अहिल्या हैं ,ऋषिवर गौतम की गृह नारी
                नीरव निश्चल निष्प्राण पड़ी ,पति से शापित हो बेचारी
                          धर के गौतम का रूप अहिल्या से किया इंद्र ने छल भारी
                          तुम रखो शिला पर पद पंकज ,है जिनकी धूल चमत्कारी 
                जन्मों से संचित पुण्य से संजोग ये अद्धभुत मिला
                श्री राम प्रभु के चरण से तर गयी शापित शिला
                             वरदान बन गया पति से पाया, शाप आज उसके लिए
                              जप तप से जो दुर्लभ हैं उन रघुनाथ के दर्शन मिले
अपने समस्त जीवन के पुण्यों व जप तप के बाद भी ऋषि गौतम जो सौभाग्य प्राप्त नहीं कर सके ,अपनी पवित्रता व पतिव्रत के कारण अहिल्या ने वो सहज ही हासिल कर लिया। उनके धरम से प्रभावित हो ऋषि ने अपने समस्त पुण्यों को भोगने का भाग्य अपनी धर्मपत्नी अहिल्या को प्रदान कर दिया। देवताओं के लिए भी जो दुर्लभ हैं वो विष्णु के अवतार स्वयं आकर अहिल्या को स्वर्ग प्रदान कर रहे हैं। वाह रे भाग्य ……तभी तो कहा गया है "अहिल्या बड़े भाग तिहारे हैं ,तेरे घर राम पधारे हैं
जो रघुवर तक पहुँच न पाते ,उनसे मिलने स्वयं प्रभु आते
       जो तोहे तारे हैं वो जग के तारणहारे हैं
       अहिल्या बड़े भाग तिहारे हैं         

2 टिप्‍पणियां:

  1. kya guruji aaj ke time mein jo humlog hein paise aur apni swarth ke khatir koi bhi kaam karnese piche nahin hatte ye jante huebhi ke ayehe hum akele jayenge bhi akele (ahalyaki tare itni kam bhg bilaske babayud apni pabitrata kayam rakh payehen ) hum karpayenge tabhi to prabhu darshan denge.

    log aajkal ye soch mein chalrahehein ki mein margayato karm kisne dekha

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