शनिवार, 4 अक्टूबर 2014

ढोल गंवार शूद्र पशु नारि……… रामचरितमानस की चौपाई का गलत अर्थ

अर्थ का अनर्थ होते आप सभी ने कई बार देखा होगा। देवनागरी लिपि अल्प विराम ,विराम ,हलन्त् ,विसर्ग ,मात्रा आदि के सहयोग से निर्मित है।जरा सी चूक अर्थ का अनर्थ करने में सक्षम है। उदाहरण के लिए ....... 'बच्चे को कमरे में बंद रखा गया '……   मात्र 'र' अक्षर का स्थान बदल देने से 'बच्चे को कमरे में बन्दर खा गया ' बन जाता है. 'कुंती ' शब्द से मात्र बिंदी हटा देने से ही जूते चलने की नौबत आ जाती है। सर और सिर में अंतर होता है। चुटिया के मध्य 'ट' को 'त' से बदल देने पर अनुमान लगाइये कि क्या क्या हो सकता है। अनुमान नहीं लगा सकते तो साक्षात कर के देखें। 'बादल'  आ की मात्रा हटा दें तो इसका अर्थ कुछ और ही हो जाएगा। अर्थात असंख्य उदाहरण मिल सकते हैं खोजने पर।
                                                                रामचरितमानस के सुन्दर काण्ड अध्याय में प्रभु राम से दया व क्षमा की याचना करते हुए समुद्र द्वारा कही गयी बात का अर्थ कहाँ से कहाँ लगा लिया गया व इस कारण तुलसी जी को कहीं कहीं कोप का भाजन भी बनना पड़ा है। पता नहीं किसी के द्वारा लिखने की त्रुटि कहें अथवा समझने की ,किन्तु विवाद तो हुआ ही है ,होता ही है।
                                     पाठकों को ज्ञात होगा ,सागर कहता है ……… 
                                                              "प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्ही ,मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्ही
                                                                ढोल गंवार सूद्र पसु नारी ,सकल ताड़ना के अधिकारी "
विद्वान लोगों में यहाँ सदा से तारना -ताड़ना के प्रति मतभेद है। उस समय विशेष व समुद्र की मानसिक स्थिति की कल्पना कीजिये। राम शर संधान कर चुके हैं।  समुद्र को भय होता है व वह राम की चिरौरी करता  है ,माफ़ी मांगता है ,स्वयं पर दया याचना कर रहा है।ऐसे में ताड़ना शब्द अगर उसका मंतव्य होता तो उस हेतु तो राम पहले ही तैयार हो चुके थे।
                                       
समुद्र भयभीत होकर  प्राणो की रक्षा मांग रहा है। वह स्वयं को तारने हेतु याचना कर रहा है। अपने को दीन साबित करना चाह रहा है।
      अतः समुद्र कहता है कि प्रभु "मैं गंवार (कम जानकार ) हूँ ,मुझ पर दया कीजिये ". जिस प्रकार ढोल चमड़े का बना हुआ है किन्तु  नमी के संपर्क में आने से खराब हो जाता है। ढोल किसी की आजीविका का साधन है ,किसी के मनोरंजन का साधन है। किन्तु अपनी अवस्था के कारण अपनी देख रेख स्वयं करने में असमर्थ है।अतः  इसकी अनदेखी हितकर नहीं है ,इस पर निरंतर दृष्टि बनाये रखना ही इसके लाभ प्राप्त करा सकता है। पाठक ध्यान दें की ताड़ना शब्द का अर्थ देखना भी होता है ,निगाह रखना भी होता है। गंवार शब्द कमजोर मनुष्य के लिए प्रयुत्त होने वाला शब्द है ,वो कमजोर है अतः दया का पात्र है। उस पर दृष्टि रखना आवश्यक है अन्यथा वह अपने अधिकारों से वंचित रह सकता है। वह आप समर्थ लोगों की दृष्टि का  पात्र है। शूद्र शब्द उस समय काल में सर्वाधिक परिश्रमी प्रजाति के लिए उपयोग होता था (बाद में इसका गलत अर्थ ले लिया गया )  . खेतों में,पशुशालाओं में,कारखानो में निरंतर स्वयं को झोंक कर रखनेवाले लोग शूद्र थे। समाज हित में वे निरंतर कार्य करते थे ,व इस कारण अपने लिए उनके पास समय नहीं होता था। उनके स्वास्थ्य की ,उनके हितों की अनदेखी समाज के लिए घातक दुष्परिणाम प्रस्तुत कर सकती थी।  अतः उनका ध्यान रखना ,उन पर निगाह बनाये रखना आवश्यक था। पशु दूध देने वाले ,चमड़ा देने वाले , ऊन  देने वाले ,खेतों में हल चलाने वाले ,सामान व मनुष्य को परिवहन देने वाले जीव थे। घोड़े ,हाथी ,गायों आदि के बिना उस समय काल की कल्पना भी नहीं की जा सकती। अतः इनकी सेवा आवश्यक थी। ये स्वयं अपनी देखभाल करने में असमर्थ हैं। इस कारण इन पर निगाह बनाये रखना आवश्यक है।
                                            इसी प्रकार स्त्री को ईश्वर ने नैसर्गिक रूप से सेवा व त्याग के भाव से परिपूर्ण किया है।अपने घर में ही देखिये,माँ सबसे अंत में ही भोजन करती होगी। बहन खुद अपनी पढाई के साथ साथ आपके वस्त्र व खाने के बर्तन भी धोती होगी ,घर की सफाई भी उसी के जिम्मे होगी। धर्मपत्नी होगी तो स्वाभाविक रूप से ये सारे कार्य उसी के जिम्मे होंगे। नौकरी करे या न करे तब  भी घर का खाना ,आपके, बच्चों के कपडे ,टिफ़िन ,घर की  सफाई सब उसी के जिम्मे होगी। आपको जरा सा जुकाम भी हो तो आप रेस्ट पर होंगे किन्तु वह बुखार से तडप भी रही होगी तब भी आपको आफिस व बच्चों को स्कूल भेजना है।  सर्दियों में जब आपकी हिम्मत रजाई से बाहर आने की नहीं हो रही होगी ,माँ तब भी गाय का दूध दुहकर ,दाना पानी कर आई होगी। अपने ठिठुरते हाथों की तरफ ध्यान देने की फुर्सत उस बेचारी के पास कहाँ है ?आपके रुमाल तक को प्रेस कर आपके जेब में डालने वाली श्रीमती जी के पास अपने सबसे महंगे सूट को स्त्री करने का समय नहीं है.सुबह ८ बजे आपको नाश्ता परोस देने वाली स्वयं ११ बजे तक भूखी है ,पता नहीं दवा खाई या नहीं। पता नहीं सिर दर्द  कैसा है ?किन्तु जब तक काम चल रहा है तब तक सब ठीक है ,लेकिन अगर वो बिस्तर पर पड़ गयी तो बच्चू फिर पता चलेगा ,जब घर का सारा सिस्टम  ही बिगड़ जाएगा। इसलिए उस पर निगाह रखो ,उसे ताड़ते रहो। कहीं हमारी सेवा के चक्कर में  स्वास्थ्य से तो लापरवाही नहीं कर रही है हमारे घर की स्त्रियां ?  इसीलिए वो अधिकारिणी है ,हमारी स्पेशल अटेंशन की।
                                             तुलसी को स्त्री विरोधी मानने वाले उनके द्वारा रचित सीता जी ,मंदोदरी ,कौशल्या ,अहिल्या ,सबरी आदि चरित्रों पर टिप्पणी को अनदेखा  कर जाते हैं.त्रुटि किस स्तर पर हुई है हमें नहीं पता ,किन्तु त्रुटि हुई है ,हो रही है इतना मुझे ज्ञात है। स्त्री सदा से आदरणीय है ,शाश्त्रों में उसे देवी कहा गया है। मानस बहुत बड़ा धर्मग्रन्थ है ,हिन्दू धर्म की आत्मा है। इसकी लिखी प्रत्येक पंक्ति अपने आप में एक ग्रन्थ की रचना कर सकती है। इसकी एक चौपाई, एक पूरी सभ्यता को संचालित करने में सक्षम है।
                      भविष्य में इसी प्रकार किसी अन्य विषय को लेने का प्रयास करेंगे। लेख के विषय पर आपकी अमूल्य राय की बाट जोहूंगा। दीपावली की अग्रिम शुभकामनाओं सहित ....... आपका साथी……                       
               

गुरुवार, 18 सितंबर 2014

आप कैसे पा सकते हैं अपने प्रश्न का उत्तर

पाठकों के अनुरोध है की अपने प्रश्न में अपना जन्म समय व जन्म स्थान सहित जन्म तारीख की सही जानकारी दें। इतनी व्यस्तता में सर्वप्रथम तो आपके प्रश्न का चयन ही कठिनता से होता है ,और डाटा पूरा न होने के कारण प्रश्न अधूरा छोड़ना पड़ता है। एक ही प्रश्न पर वापस लौटना संभव नहीं है। जो भी पाठक तुरंत व संक्षेप में अपने प्रश्न का उत्तर चाहते हैं वे हमारी वेब साइट www . astrologerindehradun. com के जरिये शुल्क जमा करने के पश्चात ही संस्थान की सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। ब्लॉग के जरिये प्रतिदिन पांच प्रश्नो का चयन किया जाता है जिनका जवाब निशुल्क दिया जाता है पश्चात शुल्क जमा कर आये प्रश्नो व यहाँ व्यक्तिगत अप्पोइंमेंट्स को देखना हमारी प्राथमिकता होती है । आजीविका की शर्तों में बंधे होने के कारण प्रत्येक पाठक के प्रश्न को लेना हमारे लिए भी तो  संभव नहीं है ,कृपया पाठक भी इस बात को समझें। प्रतिदिन के लगभग 150- 200  सवालों में से प्रकाशित करने वाले प्रश्न का सर्वप्रथम चयन होता है पश्चात जवाब हेतु रैंडम प्रक्रिया द्वारा पांच प्रश्नो को चुना जाता है। इसके अलावा पाठ -जाप आदि में व्यस्त होने के कारण कई बार सशुल्क आये प्रश्नो के जवाब देने में थोड़ा विलंब हो जाता है तो कृपया पाठक सब्र रखें। किसी भी अवस्था  में संस्थान शुल्क जमा होने के  36 घंटों के भीतर आपसे संपर्क कर चुका होता है.जो पाठक अपने प्रश्न का उत्तर whatsup आदि पर चाहते हैं तो  ये प्रश्न पूछते समय अवश्य बता दिया करें। आभार ……  पराशर ऐस्ट्रो