रविवार, 17 जून 2012

बुरे योग जिनका निवारण जरुरी है

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  कुंडली में हम सामान्यतः राज योगों  की ही खोज करते हैं, किन्तु कई बार स्वयं ज्योतिषी व कई बार जातक  इन दुर्योगों को नजरअंदाज कर जाता है,जिस कारण बार बार संशय होता है की क्यों ये राजयोग फलित नहीं हो रहे.आज ऐसे ही कुछ दुर्योगों के बारे में बताने का प्रयास कर रहा हूँ,जिनके प्रभाव से जातक कई योगों से लाभान्वित होने से चूक जाते हैं.सामान्यतः पाए जाने वाले इन दोषों में से कुछ इस प्रकार हैं..                                                                                        
१. ग्रहण योग: कुंडली में कहीं भी सूर्य अथवा चन्द्र की युति राहू या केतु से हो जाती है तो इस दोष का निर्माण होता है.चन्द्र ग्रहण योग की अवस्था में जातक डर व घबराहट महसूस करता है.चिडचिडापन उसके स्वभाव का हिस्सा बन जाता है.माँ के सुख में कमी आती है.किसी भी कार्य को शुरू करने के बाद उसे सदा अधूरा छोड़ देना व नए काम के बारे में सोचना इस योग के लक्षण हैं.अमूमन किसी भी प्रकार के फोबिया अथवा किसी भी मानसिक बीमारी जैसे डिप्रेसन ,सिज्रेफेनिया,आदि इसी योग के कारण माने गए हैं.यदि यहाँ चंद्रमा अधिक दूषित हो जाता है या कहें अन्य पाप प्रभाव में भी होता है,तो मिर्गी ,चक्कर व मानसिक संतुलन खोने का डर भी होता है.    सूर्य द्वारा बनने वाला ग्रहण योग पिता सुख में कमी करता है.जातक का शारीरिक ढांचा कमजोर रह जाता है.आँखों व ह्रदय सम्बन्धी रोगों का कारक बनता है.सरकारी नौकरी या तो मिलती नहीं या उस में निबाह मुस्किल होता है.डिपार्टमेंटल इन्क्वाइरी ,सजा ,जेल,परमोशन में रुकावट सब इसी योग का परिणाम है.
२. चंडाल योग: गुरु की किसी भी भाव में राहू से युति चंडाल योग बनती है.शरीर पर घाव का एक आध चिन्ह लिए ऐसा जातक भाग्यहीन होता है.आजीविका से जातक कभी संतुष्ट नहीं होता,बोलने में अपनी शक्ति व्यर्थ करता है व अपने सामने औरों को ज्ञान में कम आंकता है जिस कारण स्वयं धोखे में रहकर पिछड़ जाता है.ये योग जिस भी भाव में बनता है उस भाव को साधारण कोटि का बना देता है.मतान्तर से कुछ विद्वान् राहू की दृष्टी गुरु पर या गुरु की  केतु से युति को भी इस योग का लक्षण मानते हैं.
३.दरिद्र योग:लग्न या चंद्रमा से चारों केंद्र स्थान खाली हों या चारों केन्द्रों में पाप ग्रह हों तो दरिद्र योग होता है.ऐसा जातक अरबपति के घर में भी जनम ले ले तो भी उसे आजीविका के लिए भटकना पड़ता है,व दरिद्र जीवन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता है.
४. शकट योग:चंद्रमा से छटे या आठवें भाव में गुरु हो व ऐसा गुरु लग्न से केंद्र में न बैठा हो तो शकट योग का होना माना गया है.  ऐसा जातक जीवन भर किसी न किसी कर्ज से दबा रहता है,व सगे सम्बन्धी उससे घृणा करते हैं.वह अपने जीवन में अनगिनत उतार चढ़ाव देखता है.ऐसा जातक गाड़ी चलाने वाला भी हो सकता है.
५.उन्माद योग: (a) यदि लग्न में सूर्य हो व सप्तम में मंगल हो, (b) यदि लग्न में शनि और सातवें ,पांचवें या नवें भाव में मंगल हो (c) यदि धनु लग्न हो व लग्न- त्रिकोण में सूर्य-चन्द्र  युति हों साथ ही गुरु तृतीय भाव या किसी भी केंद्र में हो तो गुरुजनों द्वारा उन्माद योग की पुष्टि की गयी है.जातक जोर जोर से बोलने वाला ,व गप्पी होता है.ऐसे में यदि ग्रह बलिष्ट हों तो जातक पागल हो जाता है.
६. कलह योग: यदि चंद्रमा  पाप ग्रह के साथ राहू से युक्त हो १२ वें ५ वें या ८ वें भाव में हो तो कलह योग माना गया है.जातक के सारे जीवन भर किसी न किसी बात कलह होती रहती है व अंत में इसी कलह के कारण तनाव में ही उसकी मृत्यु हो जाती है.
नोट:लग्न से घड़ी के विपरीत गिनने पर चौथा-सातवां -दसवां भाव केंद्र स्थान होता है.पंचम व नवं भाव त्रिकोण कहलाते हैं. साथ ही लग्न की गिनती केंद्र व त्रिकोण दोनों में होती है.
                                            ऐसे ही कई प्रकार के योग और भी हैं जिनकी चर्चा फिर कभी करेंगे.फिलहाल यदि इन योगों में से कोई योग आपको अपनी कुंडली में दिखाई पड़ता है तो किसी योग्य ब्रह्मण द्वारा इसका उचित निवारण कराएँ.लेख आपको कैसा लगा ये जरूर बताएं ,चर्चाओं का दौर जारी रहा तो इन योगों का निवारण भी इसी ब्लॉग के द्वारा बताऊंगा.     

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शनिवार, 16 जून 2012

Destiny...Bhaaagy ... क्या लिखा है भाग्य में

 मनुष्य बलि नहीं होत है  समय होत बलवाना  ,भिल्लन लूटी गोपिका वही अर्जुन वही बाणा  .कबीर बाबाजी की ये पंक्तियाँ  जिन जिन लोगों ने पढ़ कर इस पर चिंतन किया होगा वो जानते होंगे की समय का क्या महत्त्व है.कुछ वर्षों पहले झारखण्ड की सत्ता में एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला. आम जातक के लिए ये बड़ा रोचक और हैरानी भरा किस्सा रहा होगा किन्तु ज्योतिष के जानकार बंधू जन व सभी श्रद्धेय गुरुजनों को इसकी हकीकत छुपी नहीं होगी.कैसे एक ऐसा जातक जिसे उसकी तत्कालीन पार्टी रूलिंग विधायक होते हुए भी दुबारा टिकट नहीं देती व बाद में सभी पार्टियों के दिग्गजों को हैरान कर वो जातक निर्दलीय रूप से जीतकर वहां की सत्ता की सर्वोच्च कुर्सी पर विराजमान होता है.
       .                                           पार्टियों के थिंक टैंक अपने अपने अनुभव को बड़ा मानकर रणनीतियां बना रहे थे और ऊपर तारामंडल अपना निर्णय ले चुका था.जातक का कारक ग्रह अपनी सर्वोच्च अवस्था में आ चुका था,और अब अपनी शक्ति संसार को दिखाकर उसे ग्रह नक्षत्रों की ताकत का एहसास करने को बेताब था.चुनाव हुए और फिर वो हुआ जिसका अंदाजा भी किसी को नहीं था और जिसका वर्णन मैं ऊपर कर चुका हूँ.   
                                                 भाग्य जब भी देने में आता है सदा छप्पर फाड़ कर ही देता है.और जब लेने में आता है तो भुक्तभोगी जानते हैं की कैसे आता है.अब इस लेन-देन के बीच के समयकाल में कोई चीज अगर निर्णायक भूमिका निभाने की अवस्था में होती है तो वो जातक के कर्म होते हैं.कर्मों की शुद्धि कई प्रकार की विपदाओं का रुख मोड़कर हवा को आपके पक्ष में मोड़ने का सामर्थ्य रखती है.जैसे समुद्र में बहती नाव पर लगे पाल. 
                                                भारतीय ज्योतिष अपने आप में सम्पूर्ण है और इसे किसी भी कसौटी पर परखने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि आज के समय काल में ऐसे कोई कसौटी ही नहीं है जो ज्योतिष को परख सके.ज्योतिषी के सही गलत होने पर शंका हो सकती है किन्तु ज्योतिष पर कोई शंका करना हास्यपद है.समस्या बस इतनी है की आज के दौर में शास्त्र को नयी भाषा में परिभाषित करना जरुरी है.मूल तत्व वही रहेंगे किन्तु समझाने की प्रक्रिया थोडा बदलाव चाहती है.
                                               ग्रहों में सूर्य देव को महत्त्व,पावर ,और विस्तार हासिल है.ये ग्रहों के राजा हैं और कभी वक्री नहीं होते.किसी भी ग्रह के प्रभाववश ऐसा नहीं होता की ये उगना भूल जाएँ .जहाँ तक मेरे अध्ययन का सवाल है मैं सदा से ही सूर्य देव से सर्वाधिक प्रभावित होता हूँ,मेरा मानना है और शाश्त्र भी ऐसा ही संकेत करते हैं की यदि कुंडली में हजारों दोष भी हों  तो सूर्य उनका हनन कर देते हैं.जब जीवन में आप सब प्रकार के उपाय कर के हार चुके हों व किसी भी समस्या का कहीं से भी कुछ भी निदान न निकल रहा हो तो सब कुछ भूलकर सूर्य देव के उपाय करें.मैं दावे के साथ कहता हूँ की मात्र नब्बे दिनों में आप अपनी समस्याओं का हल स्वयं ही पा लेंगे.कुछ उपाय सूर्य को प्रबल करने के बता रहा हूँ,इन्हें अपनाएं और फिर जैसा भी रिजल्ट आये मुझे जरूर सूचित करें .शनि कामों को ,भाग्य को .काम के परिणाम को जमा देने या कहें रोक देने के लिए जाने जाते हैं.आप जानते ही हैं की सूर्य की गर्मी को सोकने में काला रंग अधिक सक्षम होता है.शनि महाराज काले हैं,अततः सूर्य के प्रभाव को बढाने के लिए सबसे पहले शनि के प्रभाव को कम करना जरूरी है.आलस देने वाली वस्तुओं तला- भुना,मांस -मदिरा,ढीले कपड़ों ,बड़े बालों,दाढ़ी का त्याग करें व हाथ में घड़ी अवश्य पहने.  
                              १.   रात को अधिक देर तक घर से बाहर न रहें.रात का भोजन किसी भी हालत में नौं बजे से पहले कर लें. 
                              २ .  सुबह किसी भी अवस्था में सूर्योदय से पहले ही उठकर ताम्बे के बर्तन का पानी पियें.                               ३. मल त्याग भी सूर्योदय से पहले ही कर लें.
   .                          ४. रोज सुबह किसी ऐसे मंदिर में लाल फूल चढ़ाएं जो घर से कम से कम दो किलोमीटर दूर हो,व ध्यान                                       रखें की घर से मंदिर के रास्ते में आपने किसी से भी बात नहीं करनी है,जरा भी नहीं.      
                             ५. किसी भी काम के लिए निकलने से पहले पिता के चरण स्पर्श करें.
                             ६. रविवार का व्रत रखें,व उस दिन अपने व्यक्तिगत कपड़ों,फाइलों,दस्तावेजों को व्यवस्थित करें. 
                             ७.राजा अर्थात सरकार के क्रियाकलापों से अखबार व समाचारों द्वारा संपर्क में रहें.
इन उपायों को दिल से करें और विधि के चमत्कारों को महसूस करें. अपने अनुभव व राय से मुझे भी सूचित करें.आपके कीमती कमेन्ट ही मुझे आगे लिखने को प्रोत्साहित करते हैं.


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